अमीर होना और समृद्ध होने में अंतर है





पैसे खर्च करके लोगों को यह दिखाना है कि आपके पास कितना पैसा है यह पैसे कम करने का सबसे आसान तरीका है

संपत्ति,समृद्धि और अमीरी तीनों की अनेक परिभाषाएं हैं लेकिन यह बात सत्य है कि संपत्ति और समृद्धि दोनों दिखाई नहीं देती और अमीरी लोगों के सामने पैसा खर्च करके आसानी से दिखाई जा सकती है आज के भौतिकवाद युग मे बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे इसी अवगुण का फायदा उठाती है और हमें अमीर से और अमीर बनने को मजबूर करती है ज्योकि समृद्ध होने के, एक विपरीत दिशा का कार्य है

हमारी आंखों के सामने अगर एक फरारी कार गुजरती है तो हम स्वाभाविक रूप से सोचेंगे कि इस कार का मालिक अमीर है लेकिन जब हम उन्हें वास्तविक रूप से जानेंगे तब हमें पता चलेगा कि उनमें से कुछ लोग ही वास्तविक रूप सफल है जबकि बाकी लोगों ने अपनी अमीरी लोगों को दिखाने के लिए अपनी संपत्ति में से एक बड़ा हिस्सा कार खरीदने में लगा दिया है





थिंक फास्ट एंड स्लो नामक किताब कहती है कि किसी बात का निर्णय हम तब ले सकते हैं जब हमारे पास में उस निर्णय लेने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध हो

एक व्यक्ति और उसकी कार केवल दो ही जानकारी के अनुसार हम उस व्यक्ति की अमीरी अनुमान लगा लेते हैं क्योंकि अमीर व्यक्ति को पहचानना आसान है लेकिन समृद्ध व्यक्ति को ढूंढना कठिन कार्य है

समृद्धि, व्यक्ति की संपत्ति वह है जो दिखाई नहीं देती जैसे वह महंगी कारें जो खरीदी नहीं गई, वह महंगे हीरे जवाहरात जो खरीदे नहीं गए, वह विलासिता पूर्ण जिंदगी जिसमे में पैसा खर्च नहीं किया गया हो

समृद्धि का आसान शब्दों में मतलब “वह वित्तीय संपत्ति है जिसे अभी तक सामान के रूप में बदला नहीं गया है”

हां कुछ ऐसे समृद्ध लोग भी आते हैं जो काफी पैसा खर्च करते हैं लेकिन वह पहले समृद्धि को प्राप्त करते हैं बाद में अमीरी को प्राप्त करते हैं आज के दौर में अधिकतर लोग वितीय आजादी को प्राप्त करना चाहते हैं और वित्तीय आजादी समृद्धि से प्राप्त होती है ना की अमीरी से !

संसार में अधिकतर लोग अमीर हैं और कुछ ही लोग समृद्ध है अतः संपत्ति, समृद्धि और अमीरी के इस अंतर को समझ कर हमें वित्तीय आजादी की ओर आगे बढ़ना है

 

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